Friday, October 23, 2009

1 ये गुनाह एक बार किया, अब ना देखंगे निगाह भर के,
बंद कर लूं तुम्हारी यादों को, ये यादें जो जीने का सबब हैं,
ये यादें जो किसी दिलो जनम के चले जाने के बाद आती है,
ये यादें तन्हाई में रुलाती हैं , रातों में जगती हैं,
लेकिन ये यादें जो जीने का सबक देती है |
तुम्हारे आने की राह तकते थे, तुम्हे देख आह भरते थे,
अब ना इंतजार होगा ना तुम्हारी राहों में मैं मिलूँगा,
इन होठों पर अब तुम्हारा नाम ना होगा,
बदनाम ना हो जाये , इन आंखों को नम ना करूँगा |


2 कभी तन्हाई कभी उदासी सी लगती है,
ज़िन्दगी तेरे बिन वीरान सी लगती है,
हाले दिल सुनाउं किसे, की हर सूरत बेगानी सी लगती है,
पर हमे इसका गम नहीं की बदल गया जमाना,
मेरी दुनिया तुम्ही से है, कहीं तुम ना बदल जाना,
खुदा करे मोहब्बत में वो मुकाम आये,
किसी का नाम लूं तो, लब पर तुम्हारा नाम आये|

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