1 मिली हवाओं में उडने की सजा, ज़मीन के रिस्तो से कट गया हूं|
हर एक सूरत बेगानी सी लगती है, ढूंड रहा हूं कोई अपना सा|
मरासिम को मैंने ना समझा, उडने की चाहत में छोड़ आया मुस्कराहट को|
आज हवाओं ने रुख बदला तो मरासिम की याद आई, लबों की हसीं खो गयी|
आज फिर से जीना चाहता हूं, लबों की हसी लौटना चाहता हूं,
एक मरासिम चाहता हूं, एक मरासिम चाहता हूं,
2 रंजिसों में डूबी ये धरती हर दिल में एक आग सी है,
करे अगर कोई मोहब्हत वो भी गुनाह सी है |
3 जिया है ज़िन्दगी को इस कदर, हर गम को भुलाना चाहता हूं,
ज़िन्दगी में कुछ नहीं एक मुकाम , एक मुकाम चाहता हूं |
awsm poetry .............
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