Saturday, October 31, 2009

अब क्या लिखूं, चाँद सितारों की बात,
दिलो के मिलने  बिछड़ने की बात,
शरमा कर झुकती आंखे और दहकती आंखों की बात,
आज लिखना चाहता हूं, जज्बातों की बात बदलते रिस्तो की बात,
वो दोस्तों की बात, जिनके लिए सच को झूठ और झूठ को सच किया था,
जीवन के इस आपाधापी में, कहकहों को शांत होते देखा है,
जज्बातों को बिकते देखा है,
अब क्या लिखूं, चाँद सितारों की बात|

Tuesday, October 27, 2009

1 इंतजार में बैठे हैं वो कब से, पैगाम भेज रहे हैं तब से,
मिलन की हर शाम गुजर रही है , बाताये उन्हें कोई कैसे
शाम उदास, रात वीरान गुजरती है कैसे, बाताये कोई कैसे|


2 रात की खामोशी तेरी आहट से टूटती है, 
दिल की खामोशी तेरी चाहत से टूटती है |
शाम हुई सूरज अस्त हो रहा है, नए सवेरे की तमन्ना जगा कर |
बिछड़ गये हम एक दूजे की दिल में प्यार की तमन्ना जगा कर |
तेरी चाहत को अपना मुक्कदर समझते थे, इस जुदाई को भी अपना मुक्कदर समझतें हैं,
हर आहट पर तेरे आने का एहसास होता है, फिजा में तेरी खुसबू महसूस करता हूं,
शायद इसी का नाम प्यार है, शायद इसी का नाम प्यार है |

Friday, October 23, 2009

1 ये गुनाह एक बार किया, अब ना देखंगे निगाह भर के,
बंद कर लूं तुम्हारी यादों को, ये यादें जो जीने का सबब हैं,
ये यादें जो किसी दिलो जनम के चले जाने के बाद आती है,
ये यादें तन्हाई में रुलाती हैं , रातों में जगती हैं,
लेकिन ये यादें जो जीने का सबक देती है |
तुम्हारे आने की राह तकते थे, तुम्हे देख आह भरते थे,
अब ना इंतजार होगा ना तुम्हारी राहों में मैं मिलूँगा,
इन होठों पर अब तुम्हारा नाम ना होगा,
बदनाम ना हो जाये , इन आंखों को नम ना करूँगा |


2 कभी तन्हाई कभी उदासी सी लगती है,
ज़िन्दगी तेरे बिन वीरान सी लगती है,
हाले दिल सुनाउं किसे, की हर सूरत बेगानी सी लगती है,
पर हमे इसका गम नहीं की बदल गया जमाना,
मेरी दुनिया तुम्ही से है, कहीं तुम ना बदल जाना,
खुदा करे मोहब्बत में वो मुकाम आये,
किसी का नाम लूं तो, लब पर तुम्हारा नाम आये|

Thursday, October 22, 2009

1 ज़िन्दगी वक़्त पे वक़्त सिमटती गयी, हमे पता ना चला
मुकाम पर साथी छुट गया, हमे पता ना चला|

2 छोडे जा रहा हूं इन गलियों को, इन फिजाओं को,
उस ममता भरी हाथ को, उस प्यार के तूफ़ान को
साथ है तो बस याद है, जो गुजरी है इन फिजाओं में|

3 हाले दिल सुनायें किसे, हमजुबा नहीं मिलता,
राज लिए बैठे हैं, दिल को राजदार नहीं मिलता |

Wednesday, October 21, 2009

1 सर फूल वो चढा जो चमन से निकला , कामयाबी उसे मिली जो वतन से निकला |

2 उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, ना जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये|

3 एक छोटा सा व्यंग है हमारी लोकतान्त्रिक व्वस्था पर, कुछ वक़्त पहले लोकतंत्र के पर्व चुनाव में बन्दूक चलते थे, उसी पर कुछ लिखा था.

हाय ये राजनीती , बीना नीति की ये राज, हाय ये राजनीती ,
हमारा भारत महान , अपना गणतंत्र महान
लेकिन अब गन(GUN) तंत्र महान
हाय ये राजनीती
आया गणतंत्र का महापर्व, हर गन इसका हिस्सा बनेगा,
हाय ये राजनीती हाय ये राजनीती ...


4 अल्फाज नहीं मिलते क्या बयां करूँ,
खामोश हैं होंठ, दिल में कोई जज्बात नहीं
समंदर की गहराई मे जाना चाहता हूं
दिल को तस्सली के सिवा कुछ दे नहीं सकता,
ज़ख्म दिखते नहीं अभी, धुआं है धुआं सिर्फ और कुछ नहीं...

Tuesday, October 20, 2009

1 मिली हवाओं में उडने की सजा, ज़मीन के रिस्तो से कट गया हूं|
हर एक सूरत बेगानी सी लगती है, ढूंड रहा हूं कोई अपना सा|
मरासिम को मैंने ना समझा, उडने की चाहत में छोड़ आया मुस्कराहट को|
आज हवाओं ने रुख बदला तो मरासिम की याद आई, लबों की हसीं खो गयी|
आज फिर से जीना चाहता हूं, लबों की हसी लौटना चाहता हूं,
एक मरासिम चाहता हूं, एक मरासिम चाहता हूं,

2 रंजिसों में डूबी ये धरती हर दिल में एक आग सी है,
करे अगर कोई मोहब्हत वो भी गुनाह सी है |

3 जिया है ज़िन्दगी को इस कदर, हर गम को भुलाना चाहता हूं,
ज़िन्दगी में कुछ नहीं एक मुकाम , एक मुकाम चाहता हूं |

Monday, October 19, 2009

1 तू कहे तो तेरी यादों में बस जाउंगा, प्यार कभी हो ना कम तुम्हे अपना बना लूँगा |
वफ़ा की राह में रहे रौशन ऐसा दीप जलाऊंगा, तेरी यादों में बस जाऊंगा |
प्यार के राह में ऐसा मुकाम आये, किसी के नाम से पहले मेरा नाम गुनगुनाय ,
उन लम्हौं को अपना बना लूँगा, तेरी यादों में बस जाऊंगा |

2 टूटते तारे की तरह एक दिन हम जहां छोड़ चलेंगे,
दिलकश एक मेहमान की तरह खुशियों की सारी दुआ दिए जाएंगे |

3 जिया है जिन्दगी तो इस कदर, हर गम को भुलाना चाहता हूं |
ज़िन्दगी में कुछ भी नहीं बस एक मुकाम चाहता हूं |

4 इन आसूंओं से ऐसी आहट क्यों होती है, जाने दिल में ये सुगबुगाहट सी क्यों होती है ,
किसी के जाने का गम इस कदर छाया है, बिन आवाज़ बादलों में गर्गाराहट क्यों होती है,
घिर गया हूं इन्ही सवालों में, सांसें रुकी पर आंखें नम क्यों होती है |


5 नमन करता हूँ, स्वतंत्रता की नीव जिनके लहू से है,
नमन करता हूँ, खेतो की हरयाली जिनके पसीने से है,
नमन करता हूँ, इस धरा को जहाँ जीवन का रंग देखा

6 अब तो खामोशी से हंस कर ज़िंदगी से कहता हूँ ये क्या आँख मिचोली है , है ये कैसी तेरी अठखेली है ,आग लगती मेरे सिने मे , और हर लम्हा मुस्कुरा कर जीना सिखाती है , तू बड़ी अलबेली है मतवाली है ए ज़िंदगी तू बहुत मतवाली है...