1 इंतजार में बैठे हैं वो कब से, पैगाम भेज रहे हैं तब से,
मिलन की हर शाम गुजर रही है , बाताये उन्हें कोई कैसे
शाम उदास, रात वीरान गुजरती है कैसे, बाताये कोई कैसे|
2 रात की खामोशी तेरी आहट से टूटती है,
दिल की खामोशी तेरी चाहत से टूटती है |
शाम हुई सूरज अस्त हो रहा है, नए सवेरे की तमन्ना जगा कर |
बिछड़ गये हम एक दूजे की दिल में प्यार की तमन्ना जगा कर |
तेरी चाहत को अपना मुक्कदर समझते थे, इस जुदाई को भी अपना मुक्कदर समझतें हैं,
हर आहट पर तेरे आने का एहसास होता है, फिजा में तेरी खुसबू महसूस करता हूं,
शायद इसी का नाम प्यार है, शायद इसी का नाम प्यार है |
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