Thursday, October 22, 2009

1 ज़िन्दगी वक़्त पे वक़्त सिमटती गयी, हमे पता ना चला
मुकाम पर साथी छुट गया, हमे पता ना चला|

2 छोडे जा रहा हूं इन गलियों को, इन फिजाओं को,
उस ममता भरी हाथ को, उस प्यार के तूफ़ान को
साथ है तो बस याद है, जो गुजरी है इन फिजाओं में|

3 हाले दिल सुनायें किसे, हमजुबा नहीं मिलता,
राज लिए बैठे हैं, दिल को राजदार नहीं मिलता |

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