Tuesday, November 10, 2009


सूरज हूँ तो होने दो नमूदार(ज़ाहिर) मुझे भी
करना है तेरी दुनिया को बेदार मुझे भी

वह मेरा हौसला ऐसा बढ़ाया करता है
कि मुझको मेरी नज़र में गिराया करता है
मैं अपने हिस्से का हँस लू मेरी कहाँ है किस्मत
बस अपने हिस्से का रो लिया है यही बहुत है

दूसरों से तो लड़ लूंगा मैं
ख़ुद से लड़ना सिखा दीजिए
जिसको देखों वही सफ़र में है
हर किसी का सफ़र अधूरा है

------------------------------------------तैमूर

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